मंदाकिनी - पयस्विनी - गायत्री संगम: राघव प्रयाग, चित्रकूट का संपूर्ण इतिहास और महिमा

🌊 मंदाकिनी - पयस्विनी - गायत्री संगम: चित्रकूट का पवित्र राघव प्रयाग तीर्थ

📜 पावन नदियों का त्रिवेणी संगम और राघव प्रयाग घाट

Mandakini Payashravani Gayatri Sangam Raghav Prayag

भगवान श्री राम की पावन क्रीड़ा स्थली चित्रकूट में कई ऐसे अलौकिक और धार्मिक स्थल हैं, जो सीधे तौर पर हमारे प्राचीन इतिहास और सनातन संस्कृति से जुड़े हैं। इसी क्रम में, चित्रकूट की पवित्र धरा पर तीन पावन नदियों— मंदाकिनी, पयस्विनी (पाइस्वानी) और गायत्री का अत्यंत अद्भुत और पवित्र त्रिवेणी संगम होता है. इस महान और पावन संगम स्थल को मुख्य रूप से 'राघव प्रयाग घाट' (Raghav Prayag Ghat) के नाम से जाना जाता है.

धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार, इस स्थल का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है[cite: 5]. ऐसा विश्वास किया जाता है कि स्वयं श्री राघव यानी भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने इसी पवित्र संगम तट पर अपने पूजनीय पिता महाराज दशरथ का पिंडदान (जल तर्पण) किया था[cite: 5]. यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु अपने पितरों की शांति और मोक्ष की कामना के लिए इस घाट पर आते हैं[cite: 5].

✨ प्रयाग तीर्थराज से भी बढ़कर है इस संगम की महिमा

पौराणिक ग्रंथों और धार्मिक विवरणों के अनुसार, इस पावन स्थान की महत्ता और पवित्रता को प्रयाग के महान तीर्थ से भी बढ़कर माना गया है[cite: 5]. ऐसी प्राचीन मान्यता है कि हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि (जिसे अचला सप्तमी कहा जाता है) के पावन अवसर पर स्वयं तीर्थराज प्रयाग राज जी इस संगम में स्नान करने के लिए पधारते हैं[cite: 5].

इस विशेष तिथि पर जो भी श्रद्धालु इस पवित्र जल में डुबकी लगाता है, उसके सालभर के सारे पाप और संताप नष्ट हो जाते हैं[cite: 5]. रामायण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी इस बात का स्पष्ट वर्णन मिलता है कि मंदाकिनी नदी समस्त पाप समूहों का नाश करने वाली और मनुष्य को परम पुण्य प्रदान करने वाली पावन सरिता है[cite: 5].

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. राघव प्रयाग घाट चित्रकूट में कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह पवित्र स्थल चित्रकूट में मंदाकिनी, पयस्विनी और गायत्री नदियों के संगम पर स्थित है[cite: 5].

Q2. राघव प्रयाग का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है?

उत्तर: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने इसी संगम तट पर अपने पिता महाराज दशरथ का पिंडदान किया था[cite: 5].

Q3. अचला सप्तमी (माघ शुक्ल सप्तमी) के दिन यहाँ स्नान करने का क्या फल है?

उत्तर: इस दिन स्नान करने से व्यक्ति के वर्षभर के पाप धुल जाते हैं और उसे परम पुण्य की प्राप्ति होती है, क्योंकि इस दिन स्वयं प्रयागराज जी यहाँ स्नान करने आते हैं[cite: 5].

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