Sankat Mochan Hanuman Nandi Chitrakoot: इतिहास, चमत्कार और रहस्य

🛕 संकट मोचन हनुमान जी, नांदी (चित्रकूट): इतिहास और चमत्कार

Sankat Mochan Hanuman Nandi Chitrakoot

परिचय: नांदी का संकट मोचन हनुमान मंदिर और उसकी महत्ता

चित्रकूट से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में 'नांदी' नामक ग्राम के समीप एक अत्यंत पावन और सिद्ध पीठ स्थित है, जिसे संकट मोचन हनुमान जी (Sankat Mochan Hanuman Ji Nandi) के नाम से जाना जाता है[cite: 5]. यह स्थान अपनी अलौकिक ऊर्जा और चमत्कारी इतिहास के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है[cite: 5].

📍 भौगोलिक स्थिति और संत तुलसीदास जी से संबंध

  • दूरी और स्थिति: यह पवित्र सिद्ध पीठ चित्रकूट से 35 किमी दूर उत्तर दिशा में नांदी गाँव के पास स्थित है[cite: 5].
  • तुलसीदास जी की साधना: महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी अपने निवास स्थान से प्रतिदिन भगवान हनुमान जी के दर्शन और पूजन के लिए यहाँ आया करते थे[cite: 5]. तुलसीदास जी के निवास से इस सिद्ध पीठ की दूरी मात्र 8 किलोमीटर थी[cite: 5].

🌙 स्वप्न दर्शन और मलयागिरी चंदन से प्रतिमा निर्माण

पौराणिक कथा के अनुसार, एक रात्रि हनुमान जी ने तुलसीदास जी को स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि तुम मेरी स्थापना अपने निवास स्थान के पास ही कर लो, मैं तुम्हें वहीं दर्शन दूंगा[cite: 5]. इसके पश्चात तुलसीदास जी ने गाँव के बाहर एकांत में पवित्र मलयागिरी चंदन को घिसकर हनुमान जी की अत्यंत मनमोहक प्रतिमा का निर्माण किया और उनकी आराधना की[cite: 5].

🚩 दक्षिणभिमुख मुद्रा और औरंगजेब के आक्रमण का चमत्कार

  • दक्षिणभिमुख मुद्रा: इस मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा 'दक्षिणभिमुख मुद्रा' में स्थापित है, जिसके दर्शन बहुत ही दुर्लभ माने जाते हैं[cite: 5].
  • औरंगजेब का असफल प्रयास: किंवदंती के अनुसार, एक बार मुगल शासक औरंगजेब ने हनुमान जी के इस सिद्ध स्थल की गहराई का पता लगाने के लिए जमीन की खुदाई करवाई थी[cite: 5]. अत्यधिक खुदाई के बाद भी जब कोई छोर नहीं मिला, तो औरंगजेब को विवश होकर काम रोकना पड़ा, जिससे इस स्थान का महत्व और अधिक बढ़ गया[cite: 5].

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (SEO FAQs)

Q1. संकट मोचन हनुमान जी, नांदी मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह पवित्र सिद्ध पीठ चित्रकूट से लगभग 35 किमी दूर उत्तर दिशा में नांदी गाँव के पास स्थित है[cite: 5].

Q2. इस मंदिर का संत तुलसीदास जी से क्या संबंध है?

उत्तर: तुलसीदास जी यहाँ नियमित पूजा के लिए आते थे और बाद में स्वप्न के आदेश पर उन्होंने मलयागिरी चंदन से यहाँ प्रतिमा की स्थापना की थी[cite: 5].

Q3. इस मंदिर की प्रमुख विशेषता क्या है?

उत्तर: यहाँ हनुमान जी की प्रतिमा दुर्लभ दक्षिणभिमुख मुद्रा में स्थापित है और इससे औरंगजेब की खुदाई का चमत्कार जुड़ा हुआ है[cite: 5].

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