🚩 चित्रकूट धाम सम्पूर्ण यात्रा रोडमैप (14 प्रमुख स्थल - 2 दिवसीय यात्रा गाइड)
चित्रकूट के 14 प्रमुख मंदिर एवं दर्शनीय स्थल, दूरी, वाहन और समय की पूरी जानकारी
चित्रकूट धाम में अधिकांश प्रमुख धार्मिक और दर्शनीय स्थल रामघाट के आसपास ही स्थित हैं। यहाँ से ऑटो, ई-रिक्शा और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
प्रातःकाल मंदाकिनी नदी में पवित्र स्नान करें, तुलसीदास जी की प्रतिमा के दर्शन करें, नौका विहार (Boating) का आनंद लें और संध्या समय भव्य आरती में भाग लें।
भगवान श्री कामतानाथ जी के दर्शन कर कामदगिरि पर्वत की 5 किमी पावन परिक्रमा करें। यह चित्रकूट धाम की मुख्य परिक्रमा मानी जाती है।
कामदगिरि परिक्रमा मार्ग में स्थित वह भावुक स्थल जहाँ श्री राम और भरत जी का मिलाप हुआ था। मान्यता है कि उनके प्रेम से यहाँ के पत्थर भी पिघल गए थे जिनके चिह्न आज भी मौजूद हैं।
मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित शांत एवं पवित्र कुंड जहाँ माता सीता स्नान किया करती थीं। यहाँ उनके चरणों के चिह्न भी दर्शनीय हैं।
मंदाकिनी नदी किनारे स्थित एक विशाल शिला जहाँ भगवान राम और माता सीता विश्राम करते थे। यहीं जयंत ने काक (कौए) का रूप धरकर माता सीता को चोंच मारी थी।
रामघाट के पास स्थित त्रिवेणी संगम स्थल जहाँ मंदाकिनी, पयस्विनी और गायत्री नदियों का मिलन होता है। पास ही स्थित अति प्राचीन मत्तगयेंद्रनाथ शिव मंदिर में जल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
यह वह पवित्र कुआँ है जहाँ श्री भरत जी ने भगवान राम के राज्याभिषेक हेतु समस्त तीर्थों से लाया गया जल डाला था। इस जल में स्नान व आचमन अत्यंत पवित्र माना जाता है।
ऊँची पहाड़ी पर स्थित मंदिर जहाँ पर्वत से निकलती प्राकृतिक जलधारा निरंतर हनुमान जी का अभिषेक करती है। लंका दहन के पश्चात हनुमान जी ने यहाँ अपनी ज्वाला शांत की थी।
हनुमान धारा से कुछ सीढ़ियाँ ऊपर जाने पर सीता रसोई स्थित है। यहाँ माता सीता द्वारा उपयोग किए गए प्राचीन बर्तन (बेलन, चकला आदि) पत्थरों के रूप में दर्शनीय हैं।
दो अद्भुत प्राकृतिक गुफाएँ जहाँ एक गुफा में घुटनों तक निरंतर ठंडा जल बहता है। मान्यता है कि गोदावरी नदी यहाँ गुप्त रूप से प्रकट होकर भगवान राम के दर्शन करने आई थीं।
घने जंगलों के बीच महर्षि अत्रि एवं माता अनुसूया का पावन तपोस्थल। यहीं माता अनुसूया के तपोबल से मंदाकिनी नदी का धरती पर प्राकट्य हुआ था।
जंगलों के मध्य स्थित प्राचीन शरभंग ऋषि का आश्रम जहाँ प्रभु श्री राम ने ऋषियों को अभय दान दिया था। यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता एवं आध्यात्मिक शांति से परिपूर्ण है।
19वीं शताब्दी में पेशवा विनायक राव द्वारा निर्मित स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना। अपनी सुंदर नक्काशीदार मूर्तियों के कारण इसे 'मिनी खजुराहो' कहा जाता है।
गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मभूमि, जहाँ उनके द्वारा हस्तलिखित रामचरितमानस का 'अयोध्या काण्ड' आज भी सुरक्षित रखा हुआ है।
| दर्शनीय स्थल | दूरी (रामघाट से) | यातायात का साधन | अनुमानित समय |
|---|---|---|---|
| 1. रामघाट (Ramghat) | 0 किमी (केंद्र) | पैदल / ई-रिक्शा | 1.5 - 2 घंटे |
| 2. कामतानाथ / कामदगिरि | 2 किमी | ई-रिक्शा (₹15) | 2.5 - 3 घंटे |
| 3. भरत मिलाप मंदिर | 2.5 किमी | पैदल (परिक्रमा मार्ग) | 30 मिनट |
| 4. जानकी कुंड | 3 किमी | ई-रिक्शा (₹15) | 45 मिनट |
| 5. स्फटिक शिला | 4.5 किमी | ई-रिक्शा (₹20) | 45 मिनट |
| 6. राघव प्रयाग व मत्तगयेंद्रनाथ | 0.5 किमी | पैदल | 45 मिनट |
| 7. भरत कूप | 18 किमी | शेयरिंग / प्राइवेट ऑटो | 1 घंटा |
| 8. हनुमान धारा | 4 किमी | ऑटो + रोपवे | 1.5 घंटे |
| 9. सीता रसोई | 4.5 किमी | पैदल सीढ़ियाँ | 45 मिनट |
| 10. गुप्त गोदावरी | 18 किमी | प्राइवेट / शेयरिंग ऑटो | 2 घंटे |
| 11. सती अनुसूया आश्रम | 16 किमी | प्राइवेट ऑटो / टैक्सी | 1 घंटा |
| 12. शरभंग / धारकुंडी आश्रम | 30 किमी | प्राइवेट टैक्सी | 1.5 घंटे |
| 13. गणेश बाग | 11 किमी | ऑटो / टैक्सी | 45 मिनट |
| 14. राजापुर (तुलसी जन्मस्थली) | 38 किमी | बस / प्राइवेट टैक्सी | 1.5 घंटे |
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